कॉमन ग्राउंड भारत के प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में बदलाव लाने की एक साझा प्रयास है. यह सामाजिक संगठनों, सरकारों, बाजार और तकनीकी समुदायों को एक साथ लाती है ताकि व्यवस्थागत बाधाओं को दूर किया जा सके - जिसमें विकास से हाशिए पर पड़े लोगों को बाहर रखना और पर्यावरण के नुकसान से लेकर पर्यावरण प्रबंधन और ग्रामीण आजीविका की बिखरी हुई और अलग-थलग व्यवस्थाएं शामिल हैं. मूल रूप से, कॉमन ग्राउंड जलवायु, आजीविका और समानता के परस्पर जुड़े संकटों से निपटने के लिए जवाबदेह सामाजिक बुनियादी ढांचे, सुलभ सार्वजनिक संसाधनों और समावेशी, स्व-शासित नेटवर्क में निवेश करता है.
नागरिक समाज, बाज़ार, सरकार और प्रौद्योगिकी साझेदार हमारे आगे बढ़ता नेटवर्क का हिस्सा हैं और यह नेटवर्क भारत के कॉमन्स के विकेंद्रीकृत और समावेशी प्रबंधन के लिए समर्पित है.
इस सहयोगपूर्ण समूह/गठबंधन के जरिए पार्टनर्स साथ मिलकर रणनीतियाँ बनाते हैं, कार्य समूहों का नेतृत्व करते हैं और नतीजों के लिए पारस्परिक जवाबदेही साझा करते हैं. वहीं, एक व्यापक गठबंधन शिक्षण-प्रशिक्षण, सह-निर्माण और सामूहिक प्रभाव के जरिए पूरे पारिस्थितिकी तंत्र/इको-सिस्टम में हुए बदलावों में सहयोग करता है. यह संरचना विश्वास, कुशलता और साझा उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए विकेंद्रीकृत नेतृत्व और विविध पद्धियों को स्वीकार करती है.
हमने भौगोलिक क्षेत्रों की खोज-बीन कर कॉमन्स (सांझे संसाधनों) की प्रधानता वाली दो व्यापक श्रेणियों की पहचान की:
मध्य भारत के जंगल और आदिवासी बहुल क्षेत्र
हम ऐसे पहाड़ी इलाकों और जगहों पर भी अपना कार्य क्षेत्र बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं, जहाँ बहुत सारे आंतरिक जल स्रोत हैं.
हम ऐसे पहाड़ी इलाकों और जगहों पर भी अपना कार्य क्षेत्र बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं, जहाँ बहुत सारे अंतरस्थलीय जल स्रोत हैं.
हम झारखंड, ओडिशा और तमिलनाडु में कुछ सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. हमारा मकसद वहाँ खेती, रोज़गार और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मौजूदा कार्यक्रमों में कॉमन्स-आधारित दृष्टिकोणों को शामिल कर स्थानीय इलाकों की रणनीतियों को मजबूत करना है.
integrating commons-based approaches into existing agricultural, livelihoods, and natural resource programmes.
इसके तहत वन अधिकार कानून के माध्यम से ज्यादा-से-ज्यादा पट्टेदारी दिलाना शामिल है. साथ ही, पारिस्थितिक बहाली, स्थानीय स्वशासन को बेहतर बनाने और ग्रामीणों की आमदनी बढ़ाने में मदद करने के लिए सबके सहयोग से नए हस्तक्षेप तैयार किए जाएंगे.
सेंटर फॉर रिसर्च इन स्कीम्स एंड पॉलिसीज (CRISP) जैसे सहयोगियों के साथ, हम भागीदारों की रुचि और स्थानीय सहयोग की क्षमता को ध्यान में रख कर छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में संभावनाओं का तलश शुरू कर रहे हैं.
हमारे कार्यक्षेत्र और हमारे सहयोगियों/पार्टनर्स की उपस्थिति जानने के लिए राज्यों पर क्लिक करें.
वित्तपोषक/फंडर्स हमारे सामूहिक प्रयासों की साझा कल्पना को हकीकत में बदलते हैं.
हम एक साथ कर सकते हैं
कॉमन ग्राउंड को वित्तपोषक/फंडर्स का एक समूह आर्थिक सहायता उपलब्ध कराता है, जो समावेशी शासन, पारिस्थितिक पुनर्स्थापन और सहयोगात्मक कार्रवाई के जरिए ग्रामीण आजीविका को मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
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28/29 जुलाई 2025
कॉमन ग्राउंड सार्वजनिक विमर्श/चिंतन, ग्रामीण विकास और शासन प्रणालियों में कॉमन्स के अहमियत को फिर से स्थपित करने पर ध्यान केंद्रित करता है. इसमें शामिल हैं:
लिविंग लैंडस्केप्स, एक आधार संगठन, नेतृत्व, मार्गदर्शन और रणनीतिक सामंजस्य के जरिए कॉमन ग्राउंड के पहल को आगे बढ़ाने में मदद करता है. यह साझेदार/पार्टनर्स, सरकार, लोकोपकारी संस्था और अन्य पारिस्थितिकी किरदारों के नेटवर्क के साथ संबंधों को मंजबूती प्रदान करता है, विनियामक अनुपालन सुनिश्चित करता है और साथ ही इस पहल में विश्वास, कुशलता और विविधता स्थापित करने में सहायता करता है. यह साझेदारों के साथ मिलकर कॉमन ग्राउंड को सफल बनाने वाली क्षमताएं विकसित करता है.